*सिंगरौली में आदित्य बिड़ला समूह को बंधा व अडानी ग्रुप को धिरौली खदान मिला*

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सिंगरौली — जिले में कोयले का प्रचुर भंडार होने के चलते दो नई कोल खदानों की बोली हुई है जहां कोयला खदानों में दो निजी प्रतिष्ठित घरानों ने अपना मालिकाना हक प्राप्त किया है। पहली धिरौली खदान आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी ईएमआईएल माइंस एंड मिनिरल रिसोर्सज लिमिटेड जबकि बंधा खदान अडानी ग्रुप को मिली है इंदु खदानों से प्रतिवर्ष 8 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया जा सकेगा। बंधा से प्रतिवर्ष 5 मिलियन टन और धिरौली से 3मिलियन टन कोयला का उत्पादन किया जा सकेगा ।
बता दें कि मध्य प्रदेश में कुल 6 कोयला खदान की नीलामी हुई है।बंधा और धिरौली कोयला खदान के साथ ही प्रदेश के अन्य चार कोयला खदानों से प्रतिवर्ष 1724 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होगा। इस राशि में से सिर्फ 800 सौ करोड़ रुपए सिंगरौली जिले की 2 खदानों बंधा व धिरौली से मिलेगी। इन खदानों से एक ओर जहां जिले के मिनरल फंड में बढ़ोतरी होगी वहीं दूसरी ओर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इन दोनों खदानों में शुरुआती तौर पर तकरीबन 10 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा जो कि प्राइवेट कंपनियों के द्वारा किया जाएगा।
एमपी को मिलेगा 800 करोड़ रुपए का राजस्व
आदित्य बिरला ग्रुप ने इस खदान को प्राप्त करने के लिए अदानी ग्रुप से कहीं ज्यादा राजस्व देने का ऑफर दिया है। अदानी ने ज्योग्राफिकल रीजन के 586 मिलियन टर्न पर 12.5% अधिक राजस्व दिया है जबकि आदित्य बिरला ग्रुप की एम आई एल ने 442 मिलियन टर्न के रिजर्व कुल को निकालने पर 21% अधिक राजस्व सरकार को देने के लिए बोली लगाई है । इस खदान से राज्य सरकार को लगभग 800 करोड रुपए का राजस्व प्राप्त होगा।
धिरौली से बंधा खदान देगा ज्यादा रोजगार
कई मामलों में बंधा खदान जिले के खेत में है इस खदान से जहां एक और रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे तो वहीं दूसरी ओर पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी है हितकर है भूमिगत खदान से वह भी हटाने या फिर ब्लास्टिंग जैसी गतिविधियां कम होगी जिससे प्रदूषण कि मार यहां की स्थानीय लोगों को कम झेलनी पड़ेगी। तो वहीं भूमिगत खदान में अधिक लोगों की आवश्यकता होने से लोगों को रोजगार मिलेगा। यह ग्रुप लाभ हानि को तरजीह देने के साथ है लोगों के हितों की भी सुरक्षा की जिम्मेदारी बखूबी निभाता है।
अंडर ग्राउंड में नहीं होगा प्रदूषण आदित्य बिड़ला समूह की इस कंपनी ने कोयला उत्खनन कार्य और व्यवसाई कोयला खनन के लिए बंधा खदान पर 21% प्रीमियम लगाकर अरबिंदो रीयल्टी एंड इन्फ्राट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को पीछे छोड़ दिया है बंधा कोयला खदान की बोलीकर्ता के रूप में प्रथम आने पर कंपनी को कोयला उत्पादन का मौका मिला है। समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला कोल इंडिया की कई कोयला खदानों में खदान डेवलपर कम ऑपरेटर (एमडीओ) के रूप में काम कर रहे हैं। अंडर ग्राउंड माइंस से प्रदूषण नहीं होगा।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी ने प्रेस प्रतिनिधियों से कहा कि यह एक ऐतिहासिक पल है जब लगभग 65% प्रतिभागी रियल स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर फार्म जैसे गए अंतिम उपयोग वाले क्षेत्रों से थे जो की नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने और अंतिम उपयोग की बाध्यता से जुड़े प्रावधानों को हटाने के बाद उद्योग जगत में सकारात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाता है उन्होंने यह भी कहा की नीलामी प्रक्रिया ऐतिहासिक है जो साबित करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में कोयला क्षेत्र में प्रवेश के रास्ते खोलने का सही दिशा में निर्णय लिया गया था सरकार इस कदम को देश को कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में तेजी से अग्रसर हो रहा है। कोयला आयात को रोककर स्वदेशी मुद्रा को विदेश में जाने से रोकना जरूरी है।

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