प्राचार्य के पास पानी की टंकी साफ कराने तक के लिए नहीं है फुर्सत अव्यवस्थाओं से घिरा है डिग्री महाविद्यालय बैढऩ,कोविड पर नियंत्रण पाने बेफिक्र है प्रबंधन, छात्रों को मास्क तक पहनने के लिए नहीं बनाया जा रहा दबाव,सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रही धज्जियां

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सिंगरौली 4 फरवरी। शासकीय डिग्री कॉलेज बैढऩ के प्राचार्य के पास इतना समय नहीं है कि वे पानी की टंकियों की देखभाल कर साफ-सफाई कराने का जिम्मा अपने मातहत अमले को सौंप दें। पानी की टंकी कचरे में सराबोर है तो वही काई भी जमी हुई है। इसी पानी को विद्यालय के छात्र-छात्राएं रोजाना पी रहे हैं। लेकिन महाविद्यालय प्रबंधन बेपरवाह है।
दरअसल जिला मुख्यालय बैढऩ स्थित शासकीय डिग्री कॉलेज बैढऩ अव्यवस्थाओं से घिरा हुआ है। आलम यह है कि महाविद्यालय में शुद्ध पानी के लिए छात्र-छात्राएं तरस रहे हैं। यहां की टंकी में कचरा महीनों से जमा है। जिसकी साफ-सफाई कराने के लिए महाविद्यालय प्रबंधन उदासीन है। इतना ही नहीं टंकियों में काई भी जम चुकी है। फिर भी प्रबंधन बेपरवाह बना हुआ है। जबकि कई बार महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने इस बदबूदार पेयजल के बारे में महाविद्यालय के प्राचार्य को भी अवगत करा चुके हैं। बावजूद इसके टंकी की हालत जस की बस बनी हुई है। महाविद्यालय परिसर में आरो भी लगाया गया था, लेकिन कमरे के अंदर बंद पड़ा हुआ है। गिनती में भले ही आरो दिखाई दे रहा हो, लेकिन उसे लगाया नहीं जा रहा है। लिहाजा छात्र-छात्राओं को टंकी के बदबूदार पानी पीने पड़ रहे हैं। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कलेक्टर का ध्यान आकृष्ट कराया है।
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महाविद्यालय में सोशल डिस्टेंटिंग व मास्क गायब
भारत सरकार ने कोविड-19 को लेकर गाईड लाईन भी जारी किया है। जिसके तहत मास्क पहनने एवं सोशल डिस्टेंसिंग का शत-प्रतिशत पालन करने के लिए कड़े निर्देश दिये गये हैं। बावजूद इसके भारत एवं प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देश को महाविद्यालय प्रबंधन ठेंगा दिखा रहा है। आलम यह है कि शासकीय डिग्री कॉलेज बैढऩ में जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन दूर-दूर तक नहीं किया जा रहा है तो वहीं कक्षाओं में बैठने वाले छात्र-छात्राएं फेस मास्क तक भी नहीं पहन रहे हैं। इस संबंध में कई छात्र-छात्राओं ने बताया कि महाविद्यालय प्रबंधन खुद किसी पर दबाव नहीं बनाते। जब महाविद्यालय के जिम्मेदार ही मास्क नहीं पहन रहे हैं तो छात्र-छात्राओं पर कैसे दबाव बना सकते हैं। वहीं सोशल डिस्टेंसिंग के बारे छात्र-छात्राओं ने खुलकर महाविद्यालय के प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाये और कहा कि कई बार इस मुद्दे में कहा गया, फिर भी प्राध्यापकों ने भी बातों को अनुसूनी कर दिया। लिहाजा जोखिम के बीच छात्र-छात्राएं अध्ययन करने के लिए मजबूर हैं।

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