कसक मिटा लो हिंद के वीरों, बिगाड़कर तुम चाइना का खेल

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बीजपुर 1 अगस्त, उपन्यास सम्राट एवं कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद जी के 140 में जयंती के उपलक्ष्य में रिहंद साहित्य मंच द्वारा उनकी याद में काव्य गोष्ठी का आयोजन वर्चुअल प्लेटफार्म पर किया गया। बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रविंद्र सिंह वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन कर्मचारी विकास केंद्र) ने अपने आवास पर मुंशी प्रेमचंद जी के चित्र पर पुष्प सुमन प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की तथा उन्होंने प्रेमचंद के आदर्शों पर अपने विचार व्यक्त किए ।

काव्य प्रस्तुति का शुभारंभ अरुण अचूक ने सरस्वती वंदना से किया तथा अपनी कविता -मैं भी खड़ा हूं राह में पांवड़े पलके बिछाए, तथा कुछ तो ऐसा छूट गया, सुनाकर सब को भावविभोर कर दिया । राजेश्वरी सिंह ने- कलम ही तलवार है मेरी,  मैं अद्भुत सिपाही हूं, की अभिव्यक्ति की। डीएस त्रिपाठी ने जिंदगी की संवेदनाओं को अपनी कविता -चलता रहा यह सफर जिंदगी का, से व्यक्त किया ।

रिहंद साहित्य मंच के महासचिव एवं एनटीपीसी वाराणसी से मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ने देशभक्ति पर कविता प्रस्तुत की, जिसका शीर्षक है- कसक मिटा लो हिंद के वीरों, बिगाड़कर तुम चाइना का खेल, तथा अगली कड़ी में प्रेमचंद के उपन्यासों में अभिव्यक्त -भारतीय नारियों की व्यथा, शीर्षक से काव्य पाठ प्रस्तुत किया । कार्यक्रम का कुशल संचालन कर रहे लक्ष्मीनारायण पन्ना ने अपनी ग़ज़ल -फूल महके तो गुनाह कर बैठे तथा मादरे हिंद का सजदा सुना कर माहौल खुशनुमा बनाया। आर डी दूबे ने अपनी कविता -माली अपने मेहनत से चमन में फूल खिलाता है, के माध्यम से सामाजिकता का संदेश दिया। बकरिहवा के रविंद्र श्रीवास्तव ने प्रेमचंद के ऊपर  बनाई हुई कविता-कलम के जादूगर अच्छे हैं आप, के माध्यम से प्रेमचंद जी की लेखनी का गुणगान किया। वाराणसी से सुषमा गुप्ता ने प्रेमचंद की कहानी ईदगाह पर बनाई हुई अपनी कविता- पाठकों के मानस पटल पर तूने एक गहरी छाप छोड़ दी, सुना कर हामिद के चरित्र एवं चिमटे की याद दिलाई। इसी प्रकार वाराणसी से ही प्रेमशिला श्रीवास्तव ने भी प्रेमचंद की मशहूर कहानी नमक का दरोगा पर आधारित अपनी कविता -हे प्रेमचंद तेरी ईमानदारी, बताती है तेरी ही कहानी, सुना कर समाज में ईमानदारी का संदेश दिया। स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन आर डी दूबे ने किया ।


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