*आस्था का महापर्व छठ आज से शुरू*  *घाटों की सफाई का काम बेहद धीमी गति से चालू, लोगों में आक्रोश* 

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सिंगरौली
आस्था का महापर्व छठ सूर्यदेव की उपासना का पर्व है। छठ पूजा आज बुधवार को नहाय-खाए से शुरू हो जाएगा, जो अगले चार दिनों तक चलेगा। कल 19 नवंबर को खरना और शुक्रवार 20 नवंबर की शाम सूर्य भगवान को पहला सायंकालीन अर्घ्य के बाद शनिवार की सुबह प्रात:कालीन अर्घ्य प्रदान किया जाएगा।
छट पूजा के मद्देनजर मोरवा छठ घाटों की सफाई का कार्य बेहद धीमी गति से जारी है। बुधवार सुबह निगम के कुछ कर्मी ही सफाई कार्य में जुटे दिखे। लोगों ने बताया कि वार्ड क्रमांक 8 एवं 9 के लोगों के लिए पूजा का प्रमुख स्थल पर इस वर्ष जनप्रतिनिधि व समाजसेवी भी ध्यान नहीं दे रहे। मात्र 48 घंटे बाद सूर्य की उपासना के लिए वृत्ति महिलाएं समेत सैकड़ों की तादाद में लोग घाटों पर पहुँचकर तालाब में डुबकी लगाएंगे। परंतु धीमी गति से चल रहे सफाई कार्य से यह अंदेशा लगाया जा सकता है कि निगम व जिला प्रशासन इस पावन पर्व की तैयारी के लिए कितना उदासीन दिख रहा है। एक और जहां तालाब में हर तरफ काई व गंदगी का अंबार लगा है तो वहीं दूसरी ओर घाटों के किनारे बैठने की समुचित व्यवस्था भी अभी तक नहीं बनाई जा सकती है। वहीं घाटों पर लाइटिंग व अन्य व्यवस्थाओं का भी अभी तक पता नहीं है। हालांकि तालाबों की सफाई कर रहे निगम कर्मियों का मानना है कि बहुत हद तक कार्य किया जा चुका है, वहीं समय रहते बचा हुआ कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा।

जिला प्रशासन ने छठ पूजा को लेकर शर्तों के साथ दी ढील
इस बार कोरोना संक्रमण के मद्देनजर जिला प्रशासन ने पूजा में शर्तों के साथ ढील दी है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में छठ पूजा की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन द्वारा बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिला कलेक्टर ने साफ किया कि इस बार छठ घाटों पर व्रतियों के साथ मात्र पांच व्यक्तियों को जाने की अनुमति रहेगी। वहीं 10 वर्ष से कम के बच्चे व 65 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों को घाटों पर नहीं जाने की समझाइश दी गई है। घाटों के नजदीक लगने वाले ठेले, गुमटियों या मेलों पर भी प्रतिबंध रहेगा। वहीं रात्रि के दौरान जागरण या अन्य कार्यक्रमों के लिए भी घाटों पर नहीं रुकने दिया जाएगा।

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